हिंदी साहित्य के पुरोधा मुंशी प्रेमचंद को छात्रों ने दी श्रद्धांजलि

 


हिंदी और उर्दू साहित्य के प्रख्यात लेखक मुंशी प्रेमचंद, जिनका मूल नाम धनपत राय श्रीवास्तव था, का जन्म 31 जुलाई 1880 को वाराणसी के समीप लमही गांव में हुआ था। वे अपने यथार्थवादी लेखन के लिए जाने जाते हैं, जिसमें भारतीय समाज की समस्याओं जैसे गरीबी, जातिवाद और किसानों की दुर्दशा को गहराई से दर्शाया गया है।

प्रेमचंद ने "गोदान", "गबन", "कर्मभूमि", "निर्मला" और "ईदगाह" जैसी अनेक कालजयी रचनाएँ लिखीं, जो आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं और सामाजिक परिवर्तन की झलक देती हैं।

हर वर्ष प्रेमचंद जयंती पर देशभर में विविध साहित्यिक आयोजनों का आयोजन होता है। इन कार्यक्रमों में उनकी कहानियों पर चर्चा, पाठ, नाट्य मंचन और अन्य सांस्कृतिक गतिविधियाँ आयोजित की जाती हैं। इस अवसर पर प्रेमचंद को श्रद्धांजलि दी जाती है और उनके अमूल्य साहित्यिक योगदान को स्मरण किया जाता है।

 केंद्रीय विद्यालय पारादीप पोर्ट के छात्रों ने आज प्रसिद्ध लेखक प्रेमचंद की जयंती मनाई। इस अवसर पर, छात्रों ने उनके चित्र बनाए, पोस्टर डिज़ाइन किए और उनकी विरासत को उजागर करने वाले नारे लिखे। छात्रों में उनके जीवन और साहित्यिक योगदान के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए एक सात दिवसीय पुस्तक प्रदर्शनी का भी आयोजन किया गया।

No comments:

Post a Comment

Sharing Knowledge, Spreading Kindness 📚✨

  Today, KV Paradip Port successfully organized the Pustakopahar Programme, during which a significant number of books were generously gifte...